Friday, April 15, 2016

महांपुरूष गुरसेवक जी कोटकपूरा से

आज सत्संग में बैठे बैठे विचार आया कि सारा दिन इधऱ उधर की दुनियावी बातें लिखता-पढ़ता हूं ...जो सब से ज़रूरी है सच की बातें करना...उन पर मनन करना...उन्हें हर समय चेते में रखना...उन्हें आपस में एक दूसरे से शेयर करना यह तो कहीं पीछे रहा जा रहा है।

आज जब विचार आया सत्संग में कि सत्संग का ही एक ब्लॉग ही क्यों ने शुरू कर दिया जाए...घर आकर पहला काम यही कर रहा है दास कि सत्संग की बातें लिखने लगा है ...

लिखते तो पहले थे कभी किसी डायरी में, कापी में ...और सुनते भी हैं कि सत्संग की बातें घर आकर कहीं नोट कर लेनी चाहिए, ठीक है, महांपुरूषो, वे बातें लिखने से कहीं ज़्यादा दिल में बसाने वाली होती हैं, फिर भी..

तेलीबाग सत्संग भवन लखनऊ में पिछले दो दिन से सुबह की सत्संग में कोटकपूरा से आए महात्मा श्री गुरूसेवक जी से सत्गुरू की रहमतें हासिल हो रही हैं..बहुत अच्छा लग रहा है..

महात्मा विश्वास को पक्का करने की बातें करते हैं..बात अकीदा मजबूत करने की है...जितना जितना हमारा विश्वास पक्का होगा..उतना उतना ही हम रहमतें ले पाएंगे..

महात्मा गुरसेवक जी ने आज शेयर किया कि एक हादसे में उन की टांग और पैर चला गया..सतगुरू बाबा जी तो जानी जान हैं...जब ये बाबाजी से मिलने गये तो उन्होंने फिर भी पूछ लिया कि यह कैसे हुआ....इन विश्वासी महात्मा का विश्वास इतना पक्का कि अपना राग अलापने की बजाए गुरू को कहा कि महाराज, आप जी वहीं तो थे, आप के सामने ही तो हुआ है....बाबाजी ने जवाब दिया...अच्छा!....चिंता मत करना, आर्टिफिशियल टांग और पैर लगवा लेना जो तुम्हारी असली टांग से भी बढ़िया काम करेगी...

गुरू का वचन तो फिर ऐसा ही होता है ...गुरसेवक जी ने यह बताया कि इस नकली टांग और पैर की वजह से मुझे कभी लगा ही नहीं कि मैं handicapped हूं ..मैं सभी काम बढ़ चढ़ कर करता हूं ...मसूरी में जाता हूं तो पहाड़ी पर भी सब से पहले चढ़ता हूं ...सब गुरू की कृपा...

आज सत्संग के बाद प्रसाद ग्रहण करते हुए भी जब दास ने महात्मा जी को ज़मीन पर चौकड़ी मार कर बैठे देखा तो दास ने गुरू की रहमतों को नमन किया...

अच्छा, आज पहली पोस्ट को यहीं विराम देता हूं ...महांपुरूषो अगर आप जी ने भी कुछ इस ब्लाग में कहना हो तो दास को ई-मेल कर दीजिए...या फिर किसी व्हाट्सएप ग्रुप पर दास को भेज दीजिए..
बाबा जी, आप का बहुत बहुत शुक्र है

धन निरंकार जी...
तू ही निरंकार
मैं तेरी शरण हां
मैंनू बक्श लो...

गुरसेवक जी के बारे में तेली बाग के मुखी महात्मा रवि शर्मा जी ने बताया कि वे एक बहुत अच्छे गीतकार भी हैं...कल उन्होंने अपने एक गीत से भी संगतों को निहाल किया...आप भी सुनिएगा...


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